चलता चला .. बस चलता चला ..

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कहते कहते, कहता  चला मैं

moving onबहते बहते बस, बहता  चला मैं
अनजानी मंजिलों  की इस  खोज मे
क्यूं रास्तों की उस मस्ती को भुलाता  चला मैं

मंजिलें  इतनी बड़ी हो गई थी शायद
की साथ चल रहे राहियों  को पीछे छोड़ता  चला मैं
भूल गया की कोई साथ भी था मेरे
हाय अपने आप मेई क्यूं डूबता  चला मैं

जिंदगी मे आगे बदने की इस  दौड़ में
अपनों  को हाय क्यूं, भूल सा  गया मैं
और मंजिलों  को फलक की इस  चाह  में
मंजिलें दिखने वाले  उन् साथियों  से ही क्यूँ रूठ सा गया मैं

वो कहते रहे, पीछे मुड़के  देख तो ज़रा
वापस  आ जाने मे, कुछ भी नहीं है बूरा.
पर  कसमों वादों को ठुकरा के मैं बेगर्द
अंधियारे आसमानों को चूने की ख्वाइश में
चलता चला
बस चलता चला

वो कहते रहे, पीछे मुड़के  देख तो ज़रा
अंजाने रास्तों मे, कभी कुछ नहीं है रखा
पर  हज़ारों आसमानों को पाने की ज़िद में मैं
हजारों दिलों को, बस तोड़ता चला
चलता चला
बस चलता चला ..

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