बहते बहते बस, बहता चला मैं
अनजानी मंजिलों की इस खोज मे
क्यूं रास्तों की उस मस्ती को भुलाता चला मैं
मंजिलें इतनी बड़ी हो गई थी शायद
की साथ चल रहे राहियों को पीछे छोड़ता चला मैं
भूल गया की कोई साथ भी था मेरे
हाय अपने आप मेई क्यूं डूबता चला मैं
जिंदगी मे आगे बदने की इस दौड़ में
अपनों को हाय क्यूं, भूल सा गया मैं
और मंजिलों को फलक की इस चाह में
मंजिलें दिखने वाले उन् साथियों से ही क्यूँ रूठ सा गया मैं
वो कहते रहे, पीछे मुड़के देख तो ज़रा
वापस आ जाने मे, कुछ भी नहीं है बूरा.
पर कसमों वादों को ठुकरा के मैं बेगर्द
अंधियारे आसमानों को चूने की ख्वाइश में
चलता चला
बस चलता चला
वो कहते रहे, पीछे मुड़के देख तो ज़रा
अंजाने रास्तों मे, कभी कुछ नहीं है रखा
पर हज़ारों आसमानों को पाने की ज़िद में मैं
हजारों दिलों को, बस तोड़ता चला
चलता चला
बस चलता चला ..
You may also like to read:
राह में एक फूल दिखा राह में एक फूल दिखा
कोमल पंखुड़ियाँ उखड़ी हुई थीं
हरी पत्तियाँ झड़ी हुई थीं
फिर भी वो जैसे मुस्का रहा था
ठंडी हवा के झोंके में लहरा रहा था
शायद खुशी थी उसको
की बहुत नही तो सिर्फ़ ...
क्या ज़िन्दगी है ? रिश्तो की दिखावट..बनवाती मखौटे
खोखलेपन की चकाचौन्द.. पीठ पीछे भोखते..
खुश है पर अजीब सी तन्हाई..
क्या इसी जिंदगी की सच्चाई ...
नकली से पुतले.. रिश्तो का खात्मा
भटक्ती अंतरात्मा
न सुकून ना चैन...
सफ़र सोए सोए से कुछ सपने इन आँखों में.. खोये खोये कुछ अरमान..
उगते सूरज की किरणों में है इन्हें उम्मीद की तलाश..
सुबह के उजालों में होगी मंजिल से पहचान..
मगर राह भटके ये मुसाफिर.. ना पता जाना है किस...
खामोश मन की आवाज़ खामोश थी ये दुनिया , माँ के गरभ मे ..... बस माँ का ऐहसास ही था ,
जो छूता था मुझे .....
"ज्यों -ज्यों माँ ने इस दुनिया को समझने को कहा ....
और मै उलझती चली गयी.."
खामोशी का सुकून न था ....
तेज़-...
“Khush Hu” जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हू...
आज गाड़ी में जाने का वक्त नहीं है, दो कदम चल के ही खुश हु...
आज किसी ए साथ नहीं है, लैपटॉप पे मूवी देख के ही खुश हू...
आज कोई नाराज़ है, उसके इस अंदाज़ ...
सफ़र सोये सोये से कुछ सपने इन आँखों में, खोये खोये कुछ अरमान
उगते सूरज की किरणों में है इन्हें उम्मीद की तलाश
सुबह के उजालों में होगी मंजिल से पहचान
मगर राह भटके ये मुसाफिर, ना पता जाना है किस डग...
वोही सवाल लो, आ गया फिर वोही दिन...
सर्द हवा चलना बंध हुई नहीं अभी...
हम आशिकों के लिए भी बना है कोई दिन कभी???
७ दिन पहले, गुलाब...
मोहतरमा, आपसे बेहतर मेरे बाघ में...
किसका होगा शबाब???
६ दिन पहल...
भूल वो छुप कर मिलना मेरे जैसे अफ़साने से...
ख़ुशी होती मेरे मर जाने से...
मैं तस्सव्वुर में नहीं आया???
वोह शाम-ऐ-SMS बे इन्तेहाँ मेरे...
वो दफा करना हज़ारों CALLS वहाँ मेरे...
मैं तस्सव्वुर ...
मन आज तेरी बहुत याद आई...
ढूंडा तुझे सहमी हवाओं में...
तारों में, बहारों में, दब्बी हुई आहों में...
मेरे हुस्न पर जम्मने लगी है काई...
आज तेरी बहुत याद आई...
वोह बेवजह रातों में प्यार, मुस्सल...
एक सपना चाहिए पूरा करने को ..!!
एक सपना चाहिए पूरा करने को ..!!
एक आसमा चाहिए उड़ान भरने को..
एक आसरा चाहिए सर रख सोने को..
एक दोस्त चाहिए हँसाने को ..
एक मंजिल चाहिए जीत जाने को ..
एक रौशनी चाहिए अन्धकार भागने को....
Are you a gadget/gaming wizard? Would you like to write on gadgets, gaming, the Internet, software technologies, OSs and the works? Submit a sample of your writing here and if we like it, we will publish it!
Send your Movie Reviews
Watched a movie lately? Tell us whether we should watch it or just forget about it!
Send in your Movie Reviews to theindianfusion@aglasem.com or Submit Here